लोगों को मुह चिढां रहा मैरवा नल जल योजना, बनकर रह गया हैं शोभा की वस्तु

नल-जल-योजना

खबर बिहार के सिवान जिले से है जहाँ मैरवा नगर के 13 वार्डो में आज तक एक भी बूंद पानी नलजल योजना के अंतर्गत लोगो को नसीब नहीं हुआ। लोग नलजल योजना के अंतर्गत लगाए गए नल से शुद्ध व स्वच्छ पानी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन पानी न देने वाला यह नल जल योजना लोगो के उम्मीद पर पानी फेर रहा है।

बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नजदीक आते ही राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा आननफानन में लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने व वोट बैंक को मजबूत करने के लिए नल जल योजना का उद्घाटन कर दिया गया।हालांकि आज के वक्त में भी मैरवा नगर के 13 वार्डों में लोगों को एक बूंद शुद्ध शीतल जल नसीब नहीं हुआ लोग उम्मीद लगाए हुए कि आज नहीं तो कल नल से जल अवश्य ही मिलेगा लेकिन लोगों के अपेक्षा पर उपेक्षा का पानी फिरता नजर आ रहा है।

सम्बंधित अधिकारी का दावा की जल्द ही सब ठीक होगा

लोगों के द्वारा कई बार जल नहीं मिलने को लेकर हंगामा किया गया लेकिन किसी भी अधिकारी या प्रतिनिधि के द्वारा लोगों के बातों पर गौर नही किया गया और न ही सवालों के जवाब दिए गए। अधिकारी जनता के सवालों से मुकरते नजर आए, वही मैरवा शहरी जलापूर्ति योजना के अंतर्गत 21 वर्ष पूर्व मैरवा में 2 करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद आज तक नगर पंचायत की साढ़े 23 हजार की आबादी को एक बूंद भी स्वच्छ जल नसीब नहीं पाया। दूषित जल का सेवन यहां लोगों की विवशता बन कर रह गई है। नगर पंचायत क्षेत्र में जलापूर्ति को जलमीनार बनी, पानी टंकी लगी, नलकूप एवं स्टैंड पोस्ट भी लगाए गए। पूरे शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए पाइप बिछाई गई इसके बावजूद स्वच्छ जल की एक-एक बूंद के लिए यहां के लोग तरसते हैं। इसकी चिंता न तो विधायक ने की और न सांसद ने। स्वच्छ, पेयजल नहीं मिलने से ज्यादातर लोग पेट रोग से ग्रसित हो चुके हैं।
इक्कीस वर्ष पूर्व मैरवा में शहरी जलापूर्ति योजना के अंतर्गत 199.72 लाख की लागत से उच्च प्रवाही नलकूप, पम्प गृह, पांच सौ किलो क्षमता की जलमीनार तैयार की गई थी। 2100 मीटर भूगर्भ से जलापूर्ति के लिए पांच वर्ष पूर्व पीएचडी विभाग ने नगर पंचायत को जलापूर्ति कनेक्शन शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन पार्षदों ने भी कनेक्शन नहीं लिया और न ही नगर पंचायत के लोगों को कनेक्शन मिल सका। यहां हैंडपम्प से निकलने वाला पानी स्वच्छ नहीं माना जाता है। कई जगहों पर शौचालय का पानी भूगर्भ में बोरिंग पाइप से जा रहा है जिससे 30-40 फीट से निकल रहा पानी सेवन योग्य नहीं है। इसका सेवन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। शहरी क्षेत्र में 4800 घरों से होल्डिंग टैक्स के साथ नगर पंचायत स्वास्थ्य व जल कर भी वसूलता है। इसके बावजूद यहां के नागरिकों को स्वच्छ जल आपूर्ति सुविधा नहीं मिल सकी हैं।

आपको बता दु की बिहार सरकार की सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक है नल जल योजना। बिहार सरकार की योजना सरकार के सात निश्चय योजना में है। लेकिन सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात यह कि बिहार में कही भी नल जल योजना सफल नही हैं। नलजल योजना में हर जगह अनियमितता ही हैं।

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