जानिये क्या है तब्लीगी जमात (tablighi jamaat) और मरकज: पढ़े पूरी खबर

tablighi jamaat

तब्लीगी (tablighi jamaat) का अर्थ होता है, अल्लाह के संदेशों का प्रचार करने वाला। जमात का अर्थ होता है समूह और मरकज का अर्थ होता है बैठक आयोजित करने वाली जगह। यानी तब्लीगी जमात (tablighi jamaat) का अर्थ हुवा अल्लाह के संदेश को जन जन तक पहुँचाने वाली भीड़ और जिस जगह पर तब्लीगी जमात आयोजित होती है उसे मरकज कहते है।

तब्लीगी जमात की स्थापना भारत मे 1926 में मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत के हरियाणा के नूंह जिले के गांव से में किया था। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य आर्य समाजियों द्वारा पुनः मुस्लिमों को पुनःहिन्दू बनाये जाने के विरोध में था। इतिहासकारों के अनुसार मुगलकाल मे बहुत लोगो को जबरन मुस्लिम बनाया गया था, पुनः 1926 में स्वामी दयानंद सरस्वती के नेतृत्व में उन्हें हिन्दू बनाने का कार्य शुरु हुवा जिसको रोकने और इस्लाम का प्रचार करने के लिय तब्लीगी जमात की स्थापना हुई थी।

क्या होता है तब्लीगी जमात (tablighi jamaat) में

जमात का मुख्यत 6 उद्देश्य या “छ: उसूल” हैं (कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तब्लीग) हैं। आज यह जमात समूचे विश्व के लगभग 213 देशों तक फैल चुका है। तब्लीगी जमात के मरकज से ही अलग-अलग हिस्सों के लिए तमाम जमातें या समूह या फिर आप इसे जत्था भी कह सकते हैं, निकलती हैं। इस्लामिक जानकारों के अनुसार यह जमात तीन दिन, पांच दिन, दस दिन, 40 दिन और चार महीने तक की यात्रा पर जाती हैं। और इस जमात के लिए प्रशासन से कोई आदेश भी नही लिया जाता हैं। जमात में शामिल लोग सुबह-शाम शहर में निकलते हैं और लोगों से नजदीकी मस्जिद में पहुंचने के लिए कहते हैं। सुबह के वक्त ये हदीस पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर इनका ज्यादा जोर होता है। इस तरह से ये अलग-अलग इलाकों में इस्लाम का प्रचार करते हैं और अपने धर्म के बारे में लोगों को बताते हैं।

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पहला जलसा

भारत में साल 1941 में तब्लीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम या कहे जलसा हुआ था, जिसमें करीब 25,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। बताया जाता है कि 1940 तक जमात का कामकाज केवल भारत तक की सीमित था, लेकिन अब इसके शाखाएं कई प्रमुख देशों में हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में ये फैल चुका है। हर साल ये जमात एक बड़ा जलसा आयोजित करती है, जिसे इज्तेमा कहते हैं। जिसमें दुनियाभर के लाखों मुसलमान हिस्सा लेते हैं।

विवाद और तब्लीगी जमात : कही एक ही सिक्के के दो पहलू तो नही

तब्लीगी जमात का विवादों से रिस्ता

तब्लीगी जमात की स्थापना ही विवाद की बुनियाद पर हुई हैं। 10 अप्रैल 1875, गिरगाँव, मुम्बई में स्वामी दयानंद जी द्वारा आर्य समाज की स्थापना के बाद भारत मे पहली बार घर वापसी की शुरुवात हुई। यानी मुगलकाल में जो लोग हिन्दू धर्म से इस्लाम मे चले गए थे उनको पुनः हिन्दू बनाने का कार्य शुरू हुआ। इसी घर वापसी को रोकने और इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए तब्लीगी जमात की स्थापना हुई थी।

अपने स्थापना के समय से ही तब्लीगी जमात विवादों में रहा है, शुरुवात में तब्लीगी जमात का विवाद आर्य समाज से था लेकिन यह विवाद बाद में खूनी झड़प में भी बदल गया। इस विवाद औऱ झड़प की शुरुवात हुई स्वामी श्रद्धानंद जी के हत्या से। 23 दिसम्बर 1926 को अब्दुल रशीद नामक एक युवक ने धोखे से स्वामी जी की हत्या कर दी। बाद में उस युवक के तार तब्लीगी जमात से जुड़े। हालांकि, इतिहासकारों के अनुसार महात्मा गांधी जी अब्दुल रशीद को अपना भाई बता कर उसे निर्दोष बताया। लेकिन ये वही समय था जब आर्य समाज और तब्लीगी जमात दोनो की स्थापना हुई थी और दोनो एक दूसरे के कट्टर विरोधी थे। जहाँ एकतरफ तब्लीगी जमात इस्लाम का प्रचार करता था वही दूसरी तरफ स्वामी जी सनातन संस्कृति का प्रचार कर घर वापसी पर जोर दे रहे थे।

आज़ादी से पूर्व तब्लीगी जमात पर मुस्लिम लीग को समर्थन देने और पृथक राष्ट्र पाकिस्तान के मांग के भी आरोप है तो वही पाकिस्तान के निर्माण के बाद पाकिस्तान को आर्थिक सहयोग देने का भी आरोप हैं।मीडिया रिपोर्टस के अनुसार 90 के दशक में कश्मीर में पाकिस्तानी मुजाहिदीन तब्लीगी जमात के बहाने जमाती बनकर भी आये थे और कश्मीर के कई मस्जिदों में छिपे थे जिन्होंने बाद मे कश्मीरी पंडितों के साथ भयंकर रक्तपात किया।

डिफेंस एक्पर्ट के मुताबिक कांधार विमान अपहरण के तार भी तब्लीगी जमात से जुड़े है। कंधार विमान अपहरण में जुड़े आतंकी संगठन हरकत -उल-मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्य तब्लीगी जमात के सक्रिय सदस्य हैं। 2002 के गुजरात दंगे में 59 कार सेवको को जलाये जाने के केश में भी कई अभियुक्त इस तब्लीगी जमात से जुड़े थे सुर गुजरात दंगों से पहले जमात के लिए नई दिल्ली स्थित निजामुदीन पश्चिम आये थे।

2018 में पाकिस्तान स्थित हाफिज सईद की संगठन फ़लाह ए इंसानियत से पैसे लेने और भारत विरोधी गतिविधियों में हाफिज सईद को मदद करने का आरोप लगा था।

सिर्फ भारत ही नहीं अमेरिका के 9/11 हमलों के तार भी तब्लीगी जमात से जुड़े है। विकीलीक्स के रिपोर्ट के मुताबिक 9/11 के हमले के बाद ग्वांतानामो जेल में बंद अधिकतर लोगों ने तब्लीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली का दौरा किया था।

आपको बता दु की गैरो के साथ तो दूर तब्लीगी जमात का विवाद अपनों के साथ भी रहा हैं। दारुल उलूम देवबंद ने तब्लीगी जमात के भारत में सदर (अध्यक्ष) मौलाना साद पर इस्लामिक शरियत के गलत मायने बताने और अल्लाह के पैगम्बरों का अपमान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने ये भी कहा था कि मौलाना साद गुमराह हो गए हैं और उनको बिना किसी देरी के तौबा (गलती मानना) करनी चाहिए।

दरअसल 2017 की फरवरी महीने में दारुल उलूम देवबंद ने तब्लीगी जमात से जुड़े मुसलमानों को फतवा जारी कर साद पर कुरान और सुन्नत की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। मौलाना साद के भोपाल सम्मेलन में दिए गए बयान के बाद देवबंद का यह फतवा सामने आया था। साद के भोपाल सम्मेलन में कहा था, “(निजामुद्दीन) मरकज मक्का और मदीना के बाद दुनिया का सबसे पवित्र स्थल है”। मौलान साद के इस बयान को दारुल उलूम देवबंद ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बताया।

17 नवंबर, 2011 विकिलीक्स ने तब्लीगी जमात पर बड़े खुलासे करते हुए उसके और आतंकी संगठन अलकायदा के बीच संपर्क होने की बात कही। विकीलीक्स ने यह भी दावा किया कि तब्लीगी जमात और उससे जुड़े लोगों की मदद से भारत में अलकायदा और तालिबान के नेटवर्क से जुड़े लोगों को रुपया और वीजा और हथियार मुहैया करायाजा रहा है।

18 जनवरी 2016 हरियाणा के मेवात स्‍थित नूहु से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अलकायदा के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था। बताया जाता है कि ये संदिग्ध अपराधी जमात में शामिल था।

अप्रैल 2020 में जब पूरी दुनिया करोना से लड़ने के लिए सारे धार्मिक आयोजन को बन्दकर समाजिक दूरी का पालन कर रही थी तब जमात के प्रमुख मौलाना साद पर आरोप लगा कि देश विदेश से आये मौलानाओ को मरकज में इकठ्ठा कर देश भर में करोना को फैलाने का कार्य किया। इसके साथ ही कई ऑडियो क्लिप भी वायरल हुुुऐ  जिसमे मौलाना साद लोगो को भड़काते हुए ये कह रहे है कि मस्जिद आने से कोई बीमारी नही होती और अगर मस्जिद आने से मौत आती है तो मरने के लिए मस्जिद से बेहतर कोई जगह नही हैं।

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